ब्रूनर का संज्ञानात्मक अधिगम सिद्धांत (Bruner Cognitive Learning Theory in Hindi) – ब्रूनर ने संज्ञानात्मक अधिगम सिद्धांत में Discovery Learning, Spiral Curriculum तथा Modes of Representation (Enactive, Iconic एवं Symbolic) जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाएँ प्रस्तुत कीं। CTET, UPTET, Super TET, KVS, DSSSB तथा B.Ed. जैसी शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में इस सिद्धांत से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।
जेरोम ब्रूनर का परिचय
जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) एक प्रसिद्ध अमेरिकी मनोवैज्ञानिक थे, जिन्होंने संज्ञानात्मक मनोविज्ञान (Cognitive Psychology) और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने Discovery Learning तथा Spiral Curriculum की अवधारणा प्रस्तुत की। ब्रूनर का मानना था कि विद्यार्थी स्वयं खोज करके सीखते हैं, इसलिए शिक्षण प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उनकी प्रमुख पुस्तक The Process of Education (1960) मानी जाती है।
ब्रूनर का संज्ञानात्मक अधिगम सिद्धांत क्या है?
जेरोम ब्रूनर के अनुसार अधिगम एक सक्रिय (Active) एवं खोज आधारित (Discovery Learning) प्रक्रिया है, जिसमें विद्यार्थी स्वयं अनुभव, अवलोकन और समस्या-समाधान के माध्यम से ज्ञान का निर्माण करता है। ब्रूनर का मानना था कि यदि किसी विषय को उचित ढंग से प्रस्तुत किया जाए तो उसे किसी भी आयु के विद्यार्थी को सिखाया जा सकता है।
ब्रूनर का संज्ञानात्मक अधिगम सिद्धान्त (विस्तार से)
ब्रूनर के सीखने के सिद्धान्त के अनुसार पाठ योजना में सूचना प्रक्रिया एवं मॉडल का उद्दीपन तथा समुचित वातावरण को उत्पन्न किया जाता है। सीखने हेतु ब्रूनर द्वारा विकसित लेखा-जोखा होता है। इसका प्रयोग पाठ योजना सम्प्रेषण प्रत्यय-निष्पत्ति प्रतिमान सूचना प्रकरण (Information processing) में प्रमुख स्रोत के रूप में किया जाता है। आगमत तर्क के विकास हेतु यह प्रतिमान विशेष उपयोगी है। ब्रूनर तथा अन्य मनोवैज्ञानिकों ने अपने शोधों के द्वारा यह जानने का प्रयत्न किया कि मानव अपने प्रत्ययों की रचना कैसे करता है और उसके अनुसार पर्यावरण में वस्तुओं के परस्पर सम्बन्धों तथा सादृश्य को किस प्रकार देखता है? ब्रूनर के सीखने के सिद्धान्त में प्रमुख रूप से चार प्रतिमान के अवयवों का प्रयोग किया जाता है-
1. वस्तुओं, व्यक्तियों एवं घटनाओं की पहचान (Recognition of events, things and pupils)
इस प्रतिमान का पहला अवयव है आधार सामग्री को प्रस्तुत कर प्रत्ययों का बोध कराने के उद्देश्य से रोचक क्रियाओं के द्वारा वस्तुओं, व्यक्तियों या घटनाओं की पहचान करना।
2. उचित रचना कौशलों का विश्लेषण करना (Analysis of proper creative skills)
पाठ योजना में प्रयुक्त इस प्रतिमान का दूसरा अवयव है आधार सामग्री का विशेष अध्ययन करने के लिये प्रयुक्त किये जाने योग्य रचना कौशलों का विश्लेषण करना।
3. प्रत्ययों का विश्लेषण करना (Analysis of concepts)
तीसरा अवयव है विवरण, वार्ता तथा लिखित सामग्री में मिलने वाले प्रत्ययों का विश्लेषण करना ।
4. अभ्यास (Drilling)
इसका चौथा अवयव है अभ्यास। अभ्यास में छात्रों को प्रत्ययों की रचना करने के लिये कहा जाता है। छात्रों को यह अवसर दिया जाता है कि वे इन प्रत्ययों को परिभाषित तथा परिष्कृत करें।
ब्रूनर के अधिगम सिद्धांत के प्रमुख सिद्धांत
ब्रूनर ने प्रभावी अधिगम के लिए चार प्रमुख सिद्धांतों पर बल दिया, जो शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक सार्थक और प्रभावी बनाते हैं।
Motivation (अभिप्रेरणा)
सीखने की प्रक्रिया तब अधिक प्रभावी होती है जब विद्यार्थी के भीतर सीखने की आंतरिक इच्छा और रुचि हो।
Structure (संरचना)
विषयवस्तु को सरल, तार्किक एवं व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करना चाहिए ताकि विद्यार्थी आसानी से समझ सके।
Sequence (अनुक्रम)
अधिगम को सरल से कठिन तथा ज्ञात से अज्ञात की ओर क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत करना चाहिए।
Reinforcement (पुनर्बलन)
समय-समय पर अभ्यास एवं प्रतिक्रिया देकर सीखने को स्थायी बनाया जाता है।
ब्रूनर के 4 प्रमुख सिद्धांत (Quick Revision Table)
| सिद्धांत | अर्थ |
| Motivation | सीखने की आंतरिक प्रेरणा |
| Structure | विषयवस्तु को सरल एवं व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करना |
| Sequence | सरल से कठिन की ओर शिक्षण |
| Reinforcement | अभ्यास एवं पुनर्बलन द्वारा अधिगम को स्थायी बनाना |
ब्रूनर के अधिगम के तीन प्रतिनिधित्व (Modes of Representation)
ब्रूनर के अनुसार सीखना तीन प्रकार के प्रतिनिधित्व (Representation) के माध्यम से विकसित होता है। बालक प्रारंभ में क्रियाओं के माध्यम से सीखता है, फिर चित्रों के माध्यम से और अंत में भाषा एवं प्रतीकों के माध्यम से ज्ञान अर्जित करता है।
| स्तर | अर्थ | उदाहरण |
| Enactive | कार्य द्वारा सीखना | खिलौना पकड़ना |
| Iconic | चित्र द्वारा सीखना | चित्र देखकर पहचानना |
| Symbolic | भाषा/प्रतीक | शब्द, संख्या |
ब्रूनर का स्पाइरल पाठ्यक्रम (Spiral Curriculum)
Spiral Curriculum का अर्थ है कि किसी विषय को एक ही बार न पढ़ाकर अलग-अलग कक्षाओं में बार-बार बढ़ती हुई जटिलता के साथ पढ़ाया जाए। प्रत्येक बार विद्यार्थी अपने पूर्व ज्ञान के आधार पर नई अवधारणाओं को सीखता है।CTET में Spiral Curriculum से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं, इसलिए इसकी अवधारणा को अच्छी तरह समझना आवश्यक है।
उदाहरण
| कक्षा | पढ़ाया जाने वाला विषय |
| कक्षा 1 | जोड़ |
| कक्षा 3 | बड़ी संख्याओं का जोड़ |
| कक्षा 5 | दशमलव का जोड़ |
| कक्षा 8 | बीजगणित |
ब्रूनर के अधिगम सिद्धान्त की उपयोगगिता (Utility of learning theory of Bruner)
ब्रूनर का यह अधिगम का सिद्धान्त अध्यापक एवं अधिगमकत्तों के लिये निम्नलिखित रूप से उपयोगी है-
(1) शिक्षण में सम्प्रत्ययों के अधिगम को विशेष महत्त्व दिया गया है। कक्षा में शिक्षक को एक कुशल नियन्त्रक की भूमिका निभानी पड़ती है। विषयवस्तु के चयन से लेकर उसके प्रस्तुतीकरण एवं विश्लेषण तक उसका सजग रहना छात्रों के प्रभावशाली अधिगम के लिये आवश्यक है।
(2) आत्मसातीकरण हेतु शिक्षक को अधिकाधिक उदाहरण देने पड़ते हैं। उदाहरणों का विश्लेषण एवं अवबोध कराना भी आवश्यक है।
(3) कक्षा-शिक्षण में अनुक्रियात्मक एवं सामाजिक सन्दर्भ का अपना महत्त्व होता है। छात्र अपने प्रत्ययों तथा व्यूह रचना का विश्लेषण आरम्भ कर देते हैं। छात्र सबसे सरल एवं प्रभावशाली रचना कौशलों को प्रयुक्त करते हैं ताकि नवीन प्रत्ययों का बोध हो सके।
(4) इस प्रकार पाठ योजना में ब्रूनर द्वारा निर्मित ये सिद्धान्त प्रतिमान के रूप में अधिक उपयोगी है।
ब्रूनर ने अपने कार्यपरक उपागम का निर्माण उपरोक्त मॉडल के प्रयोग के साथ निम्नलिखित सिद्धान्तों को पाठ योजना का प्रमुख बिन्दु माना-
(1) अभिप्रेरणा (Motivation)। (2) संरचना (Structure) । (3) अनुक्रम (Sequence) । (4) पुनर्बलन (Reinforcement)।
ब्रूनर सिद्धांत की प्रमुख विशेषताएँ
- अधिगम एक सक्रिय प्रक्रिया है।
- खोज आधारित अधिगम पर बल।
- Spiral Curriculum का समर्थन।
- पूर्व ज्ञान के आधार पर नया ज्ञान।
- किसी भी आयु में उचित विधि से कोई भी विषय सिखाया जा सकता है।
- समस्या समाधान एवं तार्किक चिंतन पर बल।
ब्रूनर सिद्धांत का शैक्षिक महत्व
- विद्यार्थियों में खोज आधारित अधिगम (Discovery Learning) को बढ़ावा देता है।
- समस्या-समाधान एवं तार्किक चिंतन विकसित करता है।
- विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करता है।
- Spiral Curriculum के माध्यम से विषय को क्रमिक रूप से सिखाने में सहायता करता है।
- रचनात्मक एवं अनुभवात्मक अधिगम को प्रोत्साहित करता है।
- शिक्षक को मार्गदर्शक (Facilitator) की भूमिका निभाने पर बल देता है।
Discovery Learning के लाभ
| लाभ | विवरण |
| सक्रिय अधिगम | विद्यार्थी स्वयं सीखता है |
| समस्या समाधान | तार्किक सोच विकसित होती है |
| रचनात्मकता | नए विचार विकसित होते हैं |
| दीर्घकालिक अधिगम | सीखी हुई बातें लंबे समय तक याद रहती हैं |
| आत्मविश्वास | स्वयं खोजने की क्षमता बढ़ती है |
याद रखें (Exam Tip):
ब्रूनर का मानना था कि विद्यार्थी को उत्तर सीधे बताने की बजाय उसे स्वयं खोजने का अवसर देना चाहिए। इसी अवधारणा को Discovery Learning कहा जाता है।
ब्रूनर के सिद्धांत की सीमाएँ
- यह अधिक समय लेने वाली शिक्षण प्रक्रिया है।
- सभी विषयों में Discovery Learning समान रूप से प्रभावी नहीं होती।
- छोटे बच्चों को हर अवधारणा स्वयं खोजकर सीखना कठिन हो सकता है।
- प्रशिक्षित एवं दक्ष शिक्षक की आवश्यकता होती है।
Piaget और Bruner में अंतर
| आधार | Piaget | Bruner |
| मुख्य विचार | संज्ञानात्मक विकास | खोज आधारित अधिगम |
| अधिगम | Stage आधारित | किसी भी आयु में संभव |
| विकास | निश्चित अवस्थाएँ | Representation आधारित |
| शिक्षक की भूमिका | सीमित | Facilitator (मार्गदर्शक) |
| विद्यार्थी की भूमिका | स्वयं विकास | सक्रिय खोजकर्ता |
| प्रमुख अवधारणा | Cognitive Development | Discovery Learning एवं Spiral Curriculum |
ब्रूनर और वाइगोत्स्की में अंतर
| आधार | Bruner | Vygotsky |
| प्रमुख विचार | Discovery Learning | Social Learning |
| शिक्षक | Facilitator | Scaffolding प्रदान करता है |
| अधिगम | स्वयं खोज | सामाजिक सहयोग |
| प्रमुख अवधारणा | Spiral Curriculum | ZPD |
CTET Exam Point
- प्रतिपादक – जेरोम ब्रूनर
- Discovery Learning
- Spiral Curriculum
- Enactive
- Iconic
- Symbolic
- Representation
- Motivation
- Reinforcement
- Structure
- Sequence
- प्रमुख पुस्तक – The Process of Education (1960)
- प्रमुख अवधारणाएँ – Discovery Learning, Spiral Curriculum एवं Modes of Representation
- प्रमुख अन्य पुस्तक – Toward a Theory of Instruction (1966)
- Discovery Learning = खोज आधारित अधिगम
Timeline
| वर्ष | घटना |
| 1915 | जेरोम ब्रूनर का जन्म |
| 1960 | The Process of Education प्रकाशित |
| 1966 | Toward a Theory of Instruction प्रकाशित |
| 2016 | जेरोम ब्रूनर का निधन |
विरासत(Legacy):
- Discovery Learning
- Spiral Curriculum
Bruner Quick Facts
| तथ्य | विवरण |
| प्रतिपादक | Jerome Bruner |
| जन्म | 1915 |
| मुख्य योगदान | Discovery Learning |
| प्रमुख अवधारणा | Spiral Curriculum |
| शिक्षक की भूमिका | Facilitator |
CTET Quick Revision Table
| तथ्य | उत्तर |
| प्रतिपादक | Jerome Bruner |
| वर्ष | 1960 (The Process of Education) |
| प्रमुख सिद्धांत | Discovery Learning |
| पाठ्यक्रम | Spiral Curriculum |
| प्रतिनिधित्व | Enactive, Iconic, Symbolic |
| शिक्षक की भूमिका | Facilitator |
| परीक्षा | CTET, UPTET, KVS, DSSSB |
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ब्रूनर का संज्ञानात्मक अधिगम सिद्धांत – FAQs
Q1. ब्रूनर के संज्ञानात्मक अधिगम सिद्धांत का प्रतिपादन किसने किया?
उत्तर: जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) ने।
Q2. Discovery Learning क्या है?
उत्तर: यह ऐसी अधिगम प्रक्रिया है जिसमें विद्यार्थी स्वयं खोज, अनुभव और समस्या-समाधान के माध्यम से ज्ञान प्राप्त करता है।
Q3. Spiral Curriculum क्या है?
उत्तर: Spiral Curriculum के अनुसार किसी विषय को अलग-अलग कक्षाओं में बार-बार बढ़ती हुई जटिलता के साथ पढ़ाया जाना चाहिए।
Q4. ब्रूनर के प्रतिनिधित्व (Modes of Representation) के कितने स्तर हैं?
उत्तर: तीन- Enactive, Iconic, Symbolic
Q5. ब्रूनर की प्रसिद्ध पुस्तक कौन-सी है?
उत्तर: The Process of Education (1960)
Q6. CTET में Bruner Theory क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: CTET, UPTET, Super TET, KVS, DSSSB तथा B.Ed. परीक्षाओं में Discovery Learning, Spiral Curriculum, Representation तथा Bruner-Piaget Difference से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।
Q7. ब्रूनर के अनुसार अधिगम का सबसे प्रभावी तरीका क्या है?
उत्तर: ब्रूनर के अनुसार Discovery Learning अर्थात खोज आधारित अधिगम सबसे प्रभावी तरीका है, जिसमें विद्यार्थी स्वयं खोज, अनुभव एवं समस्या-समाधान के माध्यम से ज्ञान प्राप्त करता है।
Q8. ब्रूनर और पियाजे में मुख्य अंतर क्या है?
उत्तर: पियाजे के अनुसार संज्ञानात्मक विकास निश्चित अवस्थाओं (Stages) में होता है, जबकि ब्रूनर का मानना था कि उचित शिक्षण विधि अपनाकर किसी भी आयु में किसी भी विषय को प्रभावी ढंग से सिखाया जा सकता है। ब्रूनर ने Discovery Learning एवं Spiral Curriculum पर विशेष बल दिया।
Q9. ब्रूनर के अनुसार शिक्षक की भूमिका क्या होती है?
उत्तर: ब्रूनर के अनुसार शिक्षक एक Facilitator (मार्गदर्शक) होता है, जो विद्यार्थियों को स्वयं खोजकर सीखने के अवसर प्रदान करता है, न कि केवल जानकारी देने वाला व्यक्ति।
Q10. ब्रूनर के सिद्धांत में प्रतिनिधित्व (Representation) के स्तरों का क्रम क्या है?
उत्तर: Enactive → Iconic → Symbolic
याद रखने की ट्रिक (CTET Trick)
D → S → R
- D = Discovery Learning
- S = Spiral Curriculum
- R = Representation (Enactive → Iconic → Symbolic)
Quick Recap
- Discovery Learning
- Spiral Curriculum
- Enactive
- Iconic
- Symbolic
- Motivation
- Structure
- Sequence
- Reinforcement
- Facilitator
निष्कर्ष
ब्रूनर का संज्ञानात्मक अधिगम सिद्धांत बताता है कि विद्यार्थी सबसे प्रभावी ढंग से तब सीखते हैं जब वे स्वयं खोज (Discovery Learning) के माध्यम से ज्ञान का निर्माण करते हैं। उनका Spiral Curriculum और Modes of Representation का सिद्धांत आधुनिक शिक्षण की महत्वपूर्ण आधारशिला है। CTET, UPTET, Super TET, KVS, DSSSB तथा B.Ed. जैसी परीक्षाओं में ब्रूनर के सिद्धांत से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं, इसलिए अभ्यर्थियों के लिए इस सिद्धांत की प्रमुख अवधारणाओं को समझना अत्यंत आवश्यक है।
