थॉर्नडाइक का सीखने का सिद्धांत (Thorndike Theory of Learning in Hindi) शिक्षा मनोविज्ञान के सबसे महत्वपूर्ण अधिगम सिद्धांतों में से एक है। इस सिद्धांत को Trial and Error Theory (प्रयत्न एवं भूल का सिद्धांत), Stimulus-Response Theory (S-R Theory) तथा Connectionism (संबंधवाद) के नाम से भी जाना जाता है। CTET, UPTET, Super TET, KVS, DSSSB तथा B.Ed. जैसी शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में थॉर्नडाइक के सिद्धांत, Puzzle Box Experiment तथा S-R Theory से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। इसलिए इस सिद्धांत की अवधारणाओं को अच्छी तरह समझना प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए आवश्यक है।
थॉर्नडाइक का सीखने का सिद्धांत क्या है? (Thorndike Theory of Learning in Hindi)
थॉर्नडाइक का सीखने का सिद्धांत (Trial and Error Theory) शिक्षा मनोविज्ञान का एक महत्वपूर्ण अधिगम सिद्धांत है। इस सिद्धांत के अनुसार व्यक्ति प्रयास (Trial) और भूल (Error) के माध्यम से सीखता है। जब किसी सही प्रतिक्रिया से संतोषजनक परिणाम प्राप्त होता है, तो वही प्रतिक्रिया भविष्य में दोहराई जाती है। इसे उद्दीपक-प्रतिक्रिया (Stimulus-Response) सिद्धांत या संबंधवाद (Connectionism) भी कहा जाता है।
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ई. एल. थॉर्नडाइक (Edward Lee Thorndike) ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक Educational Psychology के माध्यम से सीखने के इस सिद्धांत का प्रतिपादन किया। यह सिद्धांत निम्नलिखित नामों से भी जाना जाता है—
- थार्नडाइक का सम्बन्धवाद।
- सम्बंधवाद का सिद्धांत।
- उद्दीपक सिद्धांत (Stimulus-Response theory) or (S-R Theory)।
- सीखने का सम्बंध सिद्धांत।
- प्रयत्न एवं भूल का सिद्धांत।
थार्नडाइक के सीखने के सिद्धांत का अर्थ
जब कोई व्यक्ति सीखता है. तो उसके सामने कोई विशेष सिचुएशन या उद्दीपक होता है. जो उसे एक विशेष प्रकार की प्रतिक्रिया करने के लिए प्रेरित करता है।
इस प्रकार एक विशिष्ट उद्दीपक का एक विशिष्ट प्रतिक्रिया से संबंध स्थापित हो जाता है. जिसे “उद्दीपक-प्रतिक्रिया” सम्बन्ध (S-R Bond) द्वारा व्यक्त किया जा सकता है।
थार्नडाइक के अधिगम के सिद्धांत की व्याख्या
थॉर्नडाइक ने अपने सिद्धांत की व्याख्या करते हुए कहा कि— “सीखना संबंध स्थापित करना है। संबंध स्थापित करने का कार्य मस्तिष्क करता है।”
थॉर्नडाइक का मानना था कि सीखने की प्रक्रिया में शारीरिक एवं मानसिक क्रियाओं का समन्वय आवश्यक होता है। विशिष्ट उद्दीपक (Stimulus) और विशिष्ट प्रतिक्रिया (Response) के बीच स्थापित संबंध को S-R Bond कहा जाता है, जो अधिगम की मूल आधारशिला है।
थॉर्नडाइक के सिद्धांत के प्रमुख नाम
| नाम | अर्थ |
| Trial and Error | प्रयत्न एवं भूल |
| Connectionism | संबंधवाद |
| S-R Theory | उद्दीपक-प्रतिक्रिया सिद्धांत |
| Bond Theory | संबंध सिद्धांत |
थार्नडाइक का प्रयोग
थॉर्नडाइक ने अपने सिद्धांत की पुष्टि के लिए एक प्रसिद्ध प्रयोग किया। उन्होंने एक भूखी बिल्ली को पिंजरे में बंद किया। पिंजरे का दरवाज़ा एक बटन दबाने पर खुलता था।
पिंजड़े के बाहर खाना रख दिया। बिल्ली के लिए वह खाना (Food) उद्दीपक था। उद्दीपक के कारण उसमें प्रतिक्रिया प्रारंभ हुई। उसने अनेक प्रयास किये बाहर निकलने के। और एक बार उसका पंजा बटन पर पड़ गया।
पंजा बटन पर पड़ने से दरवाजा खुल गया। जिससे उसने खाना खा लिया।
थार्नडाइक ने इस प्रयोग (Experiment) को कई बार रिपीट किया। बार-बार अभ्यास के बाद बिल्ली ने बिना किसी त्रुटि के सीधे बटन दबाना सीख लिया। अब वह सीधे बटन दबाती, दरवाज़ा खुलता और उसे भोजन मिल जाता था।
इस प्रकार उद्दीपक (Stimulus) और प्रतिक्रिया (Response) के बीच S-R Bond स्थापित हो गया।थार्नडाइक के इस सिद्धांत में प्रयास और त्रुटि का बहुत महत्व है। थार्नडाइक ने बताया कि “जब किसी कार्य मे हम त्रुटि करते हैं। और बार बार प्रयास करने पर त्रुटियों की संख्या कम या समाप्त हो जाती है। तो इसे प्रयास एवम त्रुटि द्वारा सीखना कहते हैं।”
| चरण | बिल्ली का व्यवहार |
| 1 | पिंजरे में बंद |
| 2 | बाहर भोजन रखा |
| 3 | कई प्रयास |
| 4 | बटन दबा |
| 5 | दरवाजा खुला |
| 6 | भोजन प्राप्त |
| 7 | बार-बार अभ्यास के बाद सीधे बटन दबाना |
थार्नडाइक के सीखने के सिद्धांत का शैक्षिक महत्व
इनके सिद्धांत का शैक्षिक महत्व निम्न है। –
- अभ्यास की आदत विकसित होती है।
- सीखने में पुनरावृत्ति का महत्व स्पष्ट होता है।
- कौशल आधारित शिक्षण में उपयोगी।
- समस्या-समाधान (Problem Solving) क्षमता विकसित होती है।
- Drill Method में सहायक।
- मन्द एवं औसत बुद्धि वाले छात्रों के लिए उपयोगी।
- शिक्षक को उपयुक्त पुनर्बलन देने की प्रेरणा मिलती है।
- व्यवहार परिवर्तन में सहायक।
Timeline
| वर्ष | घटना |
| 1874 | जन्म |
| 1898 | Puzzle Box Experiment |
| 1913 | Educational Psychology पुस्तक प्रकाशित |
| 1949 | निधन |
Quick Facts
| तथ्य | विवरण |
| प्रतिपादक | E. L. Thorndike |
| जन्म | 1874 |
| निधन | 1949 |
| प्रमुख सिद्धांत | Trial and Error Theory |
| अन्य नाम | Connectionism, S-R Theory |
| प्रसिद्ध प्रयोग | Puzzle Box Experiment |
| प्रसिद्ध पुस्तक | Educational Psychology |
थार्नडाइक के सिद्धांत की प्रमुख विशेषताएँ
- S-R Bond पर आधारित।
- Trial and Error Learning.
- अभ्यास का महत्व।
- पुनर्बलन (Reinforcement) का महत्व।
- सक्रिय अधिगम (Active Learning).
- व्यवहार परिवर्तन पर बल।
- अनुभव द्वारा अधिगम।
थार्नडाइक के सिद्धांत की सीमाएँ
- रटने वाले अधिगम पर अधिक बल।
- उच्च स्तरीय चिंतन की उपेक्षा।
- सभी परिस्थितियों में लागू नहीं।
- सामाजिक अधिगम की उपेक्षा।
- केवल व्यवहार पर अधिक ध्यान।
CTET/UPTET Exam Point
- प्रतिपादक – E. L. Thorndike
- सिद्धांत – Trial and Error
- S-R Theory
- Connectionism
- Puzzle Box Experiment
- Law of Effect
CTET Quick Revision Table
| तथ्य | उत्तर |
| प्रतिपादक | E. L. Thorndike |
| सिद्धांत | Trial and Error |
| अन्य नाम | Connectionism, S-R Theory |
| प्रयोग | Puzzle Box Experiment |
| पुस्तक | Educational Psychology |
| परीक्षा | CTET, UPTET, KVS, DSSSB |
थॉर्नडाइक का सीखने का सिद्धांत – FAQs
Q1. थॉर्नडाइक का सीखने का सिद्धांत किसने प्रतिपादित किया?
उत्तर: थॉर्नडाइक का सीखने का सिद्धांत अमेरिकी मनोवैज्ञानिक ई. एल. थॉर्नडाइक (Edward Lee Thorndike) ने प्रतिपादित किया।
Q2. थॉर्नडाइक का सीखने का सिद्धांत क्या है?
उत्तर: इस सिद्धांत के अनुसार व्यक्ति प्रयास एवं भूल (Trial and Error) के माध्यम से सीखता है। सही प्रतिक्रिया से संतोषजनक परिणाम मिलने पर वही प्रतिक्रिया भविष्य में दोहराई जाती है।
Q3. थॉर्नडाइक के सिद्धांत को किन अन्य नामों से जाना जाता है?
उत्तर: इस सिद्धांत को Trial and Error Theory, Stimulus-Response (S-R) Theory, Connectionism (संबंधवाद) तथा Bond Theory के नाम से भी जाना जाता है।
Q4. थॉर्नडाइक का प्रसिद्ध प्रयोग कौन-सा है?
उत्तर: थॉर्नडाइक का सबसे प्रसिद्ध प्रयोग Puzzle Box Experiment है, जिसमें उन्होंने एक भूखी बिल्ली पर प्रयोग करके Trial and Error Learning को स्पष्ट किया।
Q5. S-R Theory (Stimulus-Response Theory) क्या है?
उत्तर: S-R Theory के अनुसार किसी उद्दीपक (Stimulus) और प्रतिक्रिया (Response) के बीच संबंध स्थापित होने से अधिगम होता है। इसी संबंध को S-R Bond कहा जाता है।
Q6. थॉर्नडाइक की प्रसिद्ध पुस्तक कौन-सी है?
उत्तर: थॉर्नडाइक की प्रसिद्ध पुस्तक Educational Psychology है, जिसमें उन्होंने अपने अधिगम सिद्धांत का विस्तृत वर्णन किया है।
Q7. CTET में थॉर्नडाइक का सिद्धांत क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: CTET, UPTET, Super TET, KVS, DSSSB तथा B.Ed. जैसी परीक्षाओं में Trial and Error Theory, Puzzle Box Experiment, S-R Theory, Connectionism तथा Law of Effect से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।
Q8. थॉर्नडाइक के सिद्धांत का मुख्य विचार क्या है?
उत्तर: थॉर्नडाइक का मुख्य विचार यह है कि सीखना उद्दीपक (Stimulus) और प्रतिक्रिया (Response) के बीच संबंध स्थापित होने की प्रक्रिया है, जो अभ्यास और अनुभव से मजबूत होता है।
Q9. थॉर्नडाइक के सिद्धांत का शैक्षिक महत्व क्या है?
उत्तर: यह सिद्धांत अभ्यास, पुनरावृत्ति, कौशल विकास, समस्या-समाधान, व्यवहार परिवर्तन तथा पुनर्बलन (Reinforcement) के महत्व पर बल देता है। इसलिए इसका उपयोग विद्यालयी शिक्षण में व्यापक रूप से किया जाता है।
Q10. थॉर्नडाइक के अनुसार सीखने का सबसे प्रभावी तरीका क्या है?
उत्तर: थॉर्नडाइक के अनुसार प्रयास एवं भूल (Trial and Error) के माध्यम से सीखना सबसे प्रभावी तरीका है, जिसमें व्यक्ति लगातार प्रयास करके सही प्रतिक्रिया सीखता है और वही अधिगम स्थायी बन जाता है।
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निष्कर्ष
थॉर्नडाइक का सीखने का सिद्धांत शिक्षा मनोविज्ञान के सबसे महत्वपूर्ण अधिगम सिद्धांतों में से एक है। इस सिद्धांत ने स्पष्ट किया कि व्यक्ति प्रयास एवं भूल (Trial and Error) के माध्यम से सीखता है तथा सही प्रतिक्रिया बार-बार दोहराने से अधिगम स्थायी हो जाता है।
CTET, UPTET, Super TET, KVS, DSSSB एवं B.Ed. जैसी परीक्षाओं में Trial and Error Theory, S-R Theory, Puzzle Box Experiment तथा Connectionism से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। इसलिए अभ्यर्थियों को इस सिद्धांत की प्रमुख अवधारणाओं का अच्छी तरह अध्ययन करना चाहिए।
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